Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.14.28: उर्वशी उन दोनों मेमनों को अपने पुत्रों के समान मानती थी। इस कारण जब गन्धर्व उन्हें ले जा रहे थे और वे रो रहे थे, तो उर्वशी ने इसे सुना और अपने पति को डांटते हुए कहा, "हाय! अब मैं ऐसे अयोग्य और कायर पति के संरक्षण में मारी जा रही हूँ जो स्वयं को एक महान वीर समझता है, परन्तु वास्तव में नपुंसक है।" | bhagavat अध्याय 9.14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निशम्याक्रन्दितं देवी पुत्रयोर्नीयमानयो: ।
हतास्म्यहं कुनाथेन नपुंसा वीरमानिना ॥ २८ ॥
अनुवाद
उर्वशी उन दोनों मेमनों को अपने पुत्रों के समान मानती थी। इस कारण जब गन्धर्व उन्हें ले जा रहे थे और वे रो रहे थे, तो उर्वशी ने इसे सुना और अपने पति को डांटते हुए कहा, "हाय! अब मैं ऐसे अयोग्य और कायर पति के संरक्षण में मारी जा रही हूँ जो स्वयं को एक महान वीर समझता है, परन्तु वास्तव में नपुंसक है।"
Urvashi considered these two lambs as her sons. Therefore, when they were being taken by the Gandharvas and they started bleating, Urvashi heard it. She scolded her husband and said, “Alas! Now I am dying under the protection of such an incapable husband who is a coward and impotent but considers himself to be a great warrior.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥