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bhagavat 9.14.15-16: तत्पश्चात् बुध की पत्नी इला ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम पुरुरवा था जिसका वर्णन नवम स्कंध के प्रारम्भ में किया गया है। जब नारद ने इन्द्र के दरबार में पुरुरवा के सौंदर्य, गुणों, उदारता, व्यवहार, ऐश्वर्य और शक्ति का वर्णन किया, तो स्वर्ग की एक अप्सरा उर्वशी उसकी ओर आकर्षित हो गई। कामदेव के बाणों से छेदी गई उर्वशी उसके पास पहुँची।   |   bhagavat अध्याय 9.14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  9.14.15-16 
तत: पुरूरवा जज्ञे इलायां य उदाहृत: ।
तस्य रूपगुणौदार्यशीलद्रविणविक्रमान् ॥ १५ ॥
श्रुत्वोर्वशीन्द्रभवने गीयमानान् सुरर्षिणा ।
तदन्तिकमुपेयाय देवी स्मरशरार्दिता ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् बुध की पत्नी इला ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम पुरुरवा था जिसका वर्णन नवम स्कंध के प्रारम्भ में किया गया है। जब नारद ने इन्द्र के दरबार में पुरुरवा के सौंदर्य, गुणों, उदारता, व्यवहार, ऐश्वर्य और शक्ति का वर्णन किया, तो स्वर्ग की एक अप्सरा उर्वशी उसकी ओर आकर्षित हो गई। कामदेव के बाणों से छेदी गई उर्वशी उसके पास पहुँची।
 
Thereafter, from Ila's womb, Budha received a son named Pururava, which has been described in the beginning of the ninth chapter. When Narada described Pururava's beauty, qualities, generosity, conduct, wealth and power in Indra's court, the celestial nymph Urvashi got attracted towards him. She reached him after being pierced by Kamadeva's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)