Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.14.12: तब बालक क्रोधित हो गया और उसने अपनी माँ से सच-सच बताने के लिए कहा, "हे दुराचारिणी! तुम व्यर्थ ही शर्म कर रही हो। तुम अपने गुनाह को क्यों नहीं मान लेती? तुम अपनी गलती के बारे में मुझे बताओ।" | bhagavat अध्याय 9.14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुमारो मातरं प्राह कुपितोऽलीकलज्जया ।
किं न वचस्यसद् वृत्ते आत्मावद्यं वदाशु मे ॥ १२ ॥
अनुवाद
तब बालक क्रोधित हो गया और उसने अपनी माँ से सच-सच बताने के लिए कहा, "हे दुराचारिणी! तुम व्यर्थ ही शर्म कर रही हो। तुम अपने गुनाह को क्यों नहीं मान लेती? तुम अपनी गलती के बारे में मुझे बताओ।"
Then the boy became very angry and asked his mother to tell him the truth immediately, “Oh wicked woman! This shame shown by you is useless. Why don't you admit your fault? Tell me about your guilty character.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥