Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.13.18: ह्रस्वरोमा के पुत्र का नाम शीरध्वज था (जिसे जनक भी कहा जाता था)। जब शीरध्वज खेत जोत रहा था, तो उसके हल के आगे से सीतादेवी नाम की एक कन्या प्रकट हुई, जो बाद में भगवान रामचंद्र की पत्नी बनी। इसलिए उन्हें शीरध्वज कहा जाता था। | bhagavat अध्याय 9.13: महाराज निमि की वंशावली । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: शीरध्वजो जज्ञे यज्ञार्थं कर्षतो महीम् ।
सीता शीराग्रतो जाता तस्मात् शीरध्वज: स्मृत: ॥ १८ ॥
अनुवाद
ह्रस्वरोमा के पुत्र का नाम शीरध्वज था (जिसे जनक भी कहा जाता था)। जब शीरध्वज खेत जोत रहा था, तो उसके हल के आगे से सीतादेवी नाम की एक कन्या प्रकट हुई, जो बाद में भगवान रामचंद्र की पत्नी बनी। इसलिए उन्हें शीरध्वज कहा जाता था।
From Hrswaroma a son named Shiradhwaj (also known as Janak) was born. When he was ploughing the field, a girl named Sitadevi appeared from the tip of his plough (Sheer) who later became the wife of Lord Ramchandra. Thus he was called Shiradhwaj.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥