श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 13: महाराज निमि की वंशावली  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  9.13.12 
अराजकभयं नृणां मन्यमाना महर्षय: ।
देहं ममन्थु: स्म निमे: कुमार: समजायत ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, लोगों को असंगठित शासन के खतरे से बचाने के लिए, ऋषियों ने महाराजा निमि के भौतिक शरीर का मंथन किया, जिसके परिणामस्वरूप, उनके शरीर से एक पुत्र का जन्म हुआ ।
 
Thereafter, to save people from the fear of anarchy, the sages churned the physical body of Nimi Maharaja and as a result a son was born from the body.
तात्पर्य
अराजक-भयम्। यदि सरकार अस्थिर और अनियमित है, तो लोगों के लिए भय का खतरा है। वर्तमान समय में यह खतरा हमेशा लोगों की सरकार के कारण मौजूद है। यहाँ हम देख सकते हैं कि महान ऋषियों को नागरिकों का ठीक से मार्गदर्शन करने के लिए निमि की भौतिक देह से एक पुत्र मिला, क्योंकि ऐसा मार्गदर्शन एक क्षत्रिय राजा का कर्तव्य है। क्षत्रिय वह होता है जो नागरिकों को चोटिल होने से बचाता है। तथाकथित लोगों की सरकार में कोई प्रशिक्षित क्षत्रिय राजा नहीं होता है; जैसे ही कोई ताकतवर वोट जमा करता है, वह शास्त्रों के विशेषज्ञ विद्वान ब्राह्मणों से प्रशिक्षण के बिना मंत्री या राष्ट्रपति बन जाता है। वास्तव में, हम देखते हैं कि कुछ देशों में सरकार एक पार्टी से दूसरी पार्टी में बदलती है, और इसलिए सरकार के प्रभारी व्यक्ति इस बात को देखने के बजाय अपनी स्थिति की रक्षा करने के लिए अधिक उत्सुक होते हैं कि नागरिक खुश हैं या नहीं। वैदिक सभ्यता राजशाही को प्राथमिकता देती है। लोगों को भगवान रामचंद्र की सरकार, महाराज युधिष्ठिर की सरकार और महाराज परीक्षित, महाराज अम्बरीष और महाराज प्रह्लाद की सरकारें पसंद थीं। एक सम्राट के अधीन उत्कृष्ट शासन के कई उदाहरण हैं। धीरे-धीरे लोकतांत्रिक सरकार लोगों की ज़रूरतों के लिए अयोग्य होती जा रही है, और इसलिए कुछ दल एक तानाशाह को चुनने की कोशिश कर रहे हैं। तानाशाही एक राजशाही के समान है, लेकिन बिना प्रशिक्षित नेता के। वास्तव में लोग तब खुश होंगे जब एक प्रशिक्षित नेता, चाहे वह सम्राट हो या तानाशाह, सरकार का नियंत्रण ले और अधिकृत शास्त्रों के मानक नियमों के अनुसार लोगों पर शासन करे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)