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bhagavat 9.13.1: श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : श्रीमन्न निमि राजा ने यज्ञ आरंभ किए और फिर इक्ष्वाकु पुत्र उन्होंने महर्षि वसिष्ठ को प्रधान पुरोहित बनने हेतु निवेदन किया। तब वशिष्ठ ने उत्तर में कहा, “हे महाराज निमि, मैंने इन्द्र देवता के यज्ञ में पहले ही यह पद स्वीकार कर लिया है।”   |   bhagavat अध्याय 9.13: महाराज निमि की वंशावली   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 13: महाराज निमि की वंशावली  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.13.1 
श्रीशुक उवाच
निमिरिक्ष्वाकुतनयो वसिष्ठमवृतर्त्विजम् ।
आरभ्य सत्रं सोऽप्याह शक्रेण प्राग्वृतोऽस्मि भो: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कहा : श्रीमन्न निमि राजा ने यज्ञ आरंभ किए और फिर इक्ष्वाकु पुत्र उन्होंने महर्षि वसिष्ठ को प्रधान पुरोहित बनने हेतु निवेदन किया। तब वशिष्ठ ने उत्तर में कहा, “हे महाराज निमि, मैंने इन्द्र देवता के यज्ञ में पहले ही यह पद स्वीकार कर लिया है।”
 
Srila Sukadeva Goswami said: After inaugurating the yagnas, Maharaja Nimi, son of Ikshvaku, requested Vasiṣṭha Muni to take up the position of head priest. At that time Vasiṣṭha replied, “O Maharaja Nimi, I have already accepted this very position in a yagna initiated by Indra.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)