मरु, जिन्होंने योग शक्ति में सिद्धि हासिल की है, अभी भी कलाप ग्राम में निवास कर रहे हैं। कलियुग के अंत में, वह एक पुत्र को जन्म देंगे, जिससे विलुप्त सूर्यवंश पुनर्जीवित होगा।
Having achieved perfection in Yog Shakti, Maru is still living in a village called Kalap Gram. At the end of Kaliyug, he will produce a son who will revive the destroyed Suryavansh.
तात्पर्य
कम से कम पाँच हजार साल पहले, श्रील शुकदेव गोस्वामी ने कलप-ग्राम में मारु के अस्तित्व का पता लगाया था और कहा था कि मारु, योग-सिद्ध शरीर को प्राप्त कर, कलियुग के अंत तक जीवित रहेगा, जिसकी गणना 432,000 साल तक जारी रहने की है। यह है रहस्यमय शक्ति की पूर्णता। साँस को नियंत्रित करके, पूर्ण योगी जीवन को जब तक चाहे जारी रख सकता है। कभी-कभी हम वैदिक साहित्य से सुनते हैं कि वैदिक युग के कुछ व्यक्तित्व, जैसे व्यासदेव और अश्वत्थामा, अभी भी जीवित हैं। यहाँ हम समझते हैं कि मारु भी अभी भी जीवित है। हम कभी-कभी आश्चर्यचकित होते हैं कि कोई नश्वर शरीर इतने लंबे समय तक कैसे जीवित रह सकता है। इस लंबी आयु की व्याख्या यहाँ योग-सिद्ध शब्द द्वारा दी गई है। यदि कोई योग के अभ्यास में परिपूर्ण हो जाता है, तो वह जब तक चाहे तब तक जीवित रह सकता है। कुछ छोटे योग-सिद्ध का प्रदर्शन पूर्णता नहीं है। यहाँ पूर्णता का एक तथ्यात्मक उदाहरण है: एक योग-सिद्ध जब तक चाहे तब तक जीवित रह सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥