Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.11.27: सारे महल, महलों के द्वार, सभाभवन, चबूतरे, मन्दिर और इसी प्रकार के अन्य स्थानों को सुनहरे जलपात्रों (कलशों) से सजाया जाता था और विभिन्न प्रकार की पताकाओं से अलंकृत किया जाता था। | bhagavat अध्याय 9.11: भगवान् रामचन्द्र का विश्व पर राज्य करना । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रासादगोपुरसभाचैत्यदेवगृहादिषु ।
विन्यस्तहेमकलशै: पताकाभिश्च मण्डिताम् ॥ २७ ॥
अनुवाद
सारे महल, महलों के द्वार, सभाभवन, चबूतरे, मन्दिर और इसी प्रकार के अन्य स्थानों को सुनहरे जलपात्रों (कलशों) से सजाया जाता था और विभिन्न प्रकार की पताकाओं से अलंकृत किया जाता था।
All the palaces, palace gates, assembly halls, platforms, temples and other such places were decorated with golden water pots (Kalash) and various kinds of flags.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥