स्त्री और पुरुष के बीच आकर्षण हर समय और हर जगह व्याप्त रहता है, जो हर व्यक्ति को हर वक़्त भयभीत रखता है। यह आकर्षण ब्रह्मा और भगवान शिव जैसे नियंत्रकों में भी पाया जाता है और उनके लिए भी भय का कारण है। तो फिर उन लोगों के बारे में क्या कहा जाए जो इस भौतिक संसार में गृहस्थ जीवन से जुड़े हैं?
Attraction between man and woman or male and female is found everywhere and at all times, which always frightens everyone. Even the controllers like Brahma and Shiva have such feelings and these are causes of fear for them also. Then what can be said about those who are attached to domestic life in this material world?
तात्पर्य
जैसा कि ऊपर समझाया गया है, जब आध्यात्मिक दुनिया से प्रेम और पारलौकिक आनंद की भावनाएँ इस भौतिक दुनिया में मुड़कर परिलक्षित होती हैं, तो वे निश्चित रूप से बंधन का कारण बनती हैं। जब तक पुरुष इस भौतिक दुनिया में महिलाओं के प्रति आकर्षित होते रहेंगे और महिलाएँ पुरुषों के प्रति आकर्षित होती रहेंगी, तब तक बार-बार जन्म और मृत्यु का बंधन बना रहेगा। लेकिन आध्यात्मिक दुनिया में, जहाँ जन्म और मृत्यु का कोई भय नहीं है, अलगाव की ऐसी भावनाएँ पारलौकिक आनंद का कारण बनती हैं। परम सत्य में भावनाओं की अनंत किस्में होती हैं, लेकिन वे सभी पारलौकिक आनंद की एक ही गुणवत्ता के होते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥