तच्छ्रुत्वा भगवान् रामो रुन्धन्नपि धिया शुच: ।
स्मरंस्तस्या गुणांस्तांस्तान्नाशक्नोद् रोद्धुमीश्वर: ॥ १६ ॥
अनुवाद
सीतादेवी के पृथ्वी में प्रवेश कर जाने के समाचार को सुनकर भगवान बहुत दुखी हुए। यद्यपि वे भगवान हैं, फिर भी सीतादेवी के महान गुणों को याद करके उन्हें अपने दुख को दिव्य प्रेमवश रोकना पड़ा।
On hearing the news of Sita Devi's entry into the earth, the Lord was obviously saddened. Although He is the Lord, remembering Sita Devi's great qualities, out of His divine love, He could not restrain His grief.
तात्पर्य
भगवान रामचंद्र का सीतादेवी के पृथ्वी में प्रवेश करने की खबर पर दुःख को भौतिक नहीं माना जाना चाहिए। आध्यात्मिक दुनिया में भी अलगाव की भावनाएँ हैं, लेकिन ऐसी भावनाओं को आध्यात्मिक आनंद माना जाता है। अलगाव में दुःख भी परम में रहता है, लेकिन आध्यात्मिक दुनिया में अलगाव की ऐसी भावनाएँ अति आनंदमय हैं। ऐसी भावनाएँ तस्य प्रेम-वश्यत्व-स्वभाव, ह्लादिनी-शक्ति के प्रभाव में होने और प्रेम द्वारा नियंत्रित होने का संकेत हैं। भौतिक दुनिया में अलगाव की ऐसी भावनाएँ केवल एक विकृत प्रतिबिंब हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥