श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 10: परम भगवान् रामचन्द्र की लीलाएँ  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  9.10.44 
पुष्पकस्थो नुत: स्त्रीभि: स्तूयमानश्च वन्दिभि: ।
विरेजे भगवान् राजन् ग्रहैश्चन्द्र इवोदित: ॥ ४४ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजा परीक्षित, अपनी पुष्पक विमान पर बैठे भगवान् रामचन्द्र स्त्रियों द्वारा स्तुति किये जाने पर तथा बन्दीजनों द्वारा गुणगान किये जाने पर ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानों तारों तथा ग्रहों के बीच चन्द्रमा हो।
 
O King Parikshit, Lord Rama, seated on his Pushpaka aircraft, when the women praised him and the captives sang his praises, appeared like the Moon among the stars and planets.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)