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bhagavat 9.10.41: अयोध्या के नागरिक, अपने राजा को लम्बे समय बाद लौटते देखकर, उन्हें फूल की मालाएं प्रदान कर खुशी से उत्तरीय वस्त्र (दुपट्टे) लहराते हुए प्रसन्नता में झूमकर नाचे।   |   bhagavat अध्याय 9.10: परम भगवान् रामचन्द्र की लीलाएँ   ।   bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 10: परम भगवान् रामचन्द्र की लीलाएँ  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  9.10.41 
धुन्वन्त उत्तरासङ्गान् पतिं वीक्ष्य चिरागतम् ।
उत्तरा: कोसला माल्यै: किरन्तो ननृतुर्मुदा ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
अयोध्या के नागरिक, अपने राजा को लम्बे समय बाद लौटते देखकर, उन्हें फूल की मालाएं प्रदान कर खुशी से उत्तरीय वस्त्र (दुपट्टे) लहराते हुए प्रसन्नता में झूमकर नाचे।
 
The citizens of Ayodhya, seeing their King return after a long time, offered him garlands of flowers, waved their upper garments (dupattas) and danced with great joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)