Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 9.10.30: तदनन्तर, प्रभु श्रीराम जी ने सीता जी को अशोक वन में शिंशपा नाम के वृक्ष के नीचे एक छोटी सी कुटिया में बैठा पाया। वे श्रीराम से बिछोह होने के कारण दुखी थीं और बहुत दुबली-पतली हो गई थीं। | bhagavat अध्याय 9.10: परम भगवान् रामचन्द्र की लीलाएँ । bhagavat स्कन्ध 9: मुक्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततो ददर्श भगवानशोकवनिकाश्रमे ।
क्षामां स्वविरहव्याधिं शिंशपामूलमाश्रिताम् ॥ ३० ॥
अनुवाद
तदनन्तर, प्रभु श्रीराम जी ने सीता जी को अशोक वन में शिंशपा नाम के वृक्ष के नीचे एक छोटी सी कुटिया में बैठा पाया। वे श्रीराम से बिछोह होने के कारण दुखी थीं और बहुत दुबली-पतली हो गई थीं।
Thereafter Lord Ramachandra found Sita Devi sitting in a small hut under a tree called Shinshapa in the Ashoka forest. She had become very thin due to the sorrow caused by the separation from Rama.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥