दुःख से सब हरि भजे
सुख से भजे कोई
सुख से अगर हरि भजे
दुःख काहे का होय
जो व्यक्ति दुखी होता है वह प्रभु की भक्ति के लिए मंदिर या चर्च जाता है, लेकिन जब वह संपन्न हो जाता है तो प्रभु को भूल जाता है। इसलिए, भौतिक प्रकृति द्वारा प्रभु द्वारा दंड मनुष्य समाज में आवश्यक है क्योंकि इसके बिना मनुष्य अपनी मंद बुद्धि और मूर्खता के कारण प्रभु के प्रभुत्व को भूल जाते हैं।
