श्रीशुक उवाच
श्रूयतां मानवो वंश: प्राचुर्येण परन्तप ।
न शक्यते विस्तरतो वक्तुं वर्षशतैरपि ॥ ७ ॥
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी बोले : हे राजन्! शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले राजा! अब तुम मुझसे मनु के वंश के बारे में विस्तार से सुनो। मैं तुम्हें जितना भी संभव हो उतना बताऊँगा, लेकिन सौ साल में भी इसके बारे में सब कुछ नहीं बताया जा सकता।
Shukadeva Goswami said: O king who suppresses enemies, now listen to me in detail about the lineage of Manu. I will tell you as much as possible, although it cannot be fully told even in a hundred years.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥