श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 1: राजा सुद्युम्न का स्त्री बनना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  9.1.37 
स तस्य तां दशां दृष्ट्वा कृपया भृशपीडित: ।
सुद्युम्नस्याशयन् पुंस्त्वमुपाधावत शङ्करम् ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
सुद्युम्न की इस दयनीय स्थिति को देखकर वसिष्ठ को बड़े कष्ट हुए। उन्होंने सुद्युम्न को उसका पुराना रूप दिलाने की इच्छा से भगवान शंकर अर्थात शिवजी की पूजा फिर से प्रारम्भ कर दी।
 
Vasishtha was extremely saddened to see Sudyumna's pitiable condition. He started worshipping Lord Shiva again with the desire to restore Sudyumna's manhood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)