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श्रीमद् भागवतम
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स्कन्ध 9: मुक्ति
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अध्याय 1: राजा सुद्युम्न का स्त्री बनना
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श्लोक 36
श्लोक
9.1.36
एवं स्रीत्वमनुप्राप्त: सुद्युम्नो मानवो नृप: ।
सस्मार स कुलाचार्यं वसिष्ठमिति शुश्रुम ॥ ३६ ॥
अनुवाद
मैंने विश्वसनीय स्रोतों से सुना है कि मनु के पुत्र सुद्युम्न ने स्त्रीत्व प्राप्त कर अपने कुलगुरु वशिष्ठ को याद किया।
I have heard from reliable sources that Manu's son Sudyumna, after attaining womanhood in this way, remembered his patriarch Vashishtha.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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