श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 1: राजा सुद्युम्न का स्त्री बनना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  9.1.30 
तान् विलोक्याम्बिका देवी विवासा व्रीडिता भृशम् ।
भर्तुरङ्कात् समुत्थाय नीवीमाश्वथ पर्यधात् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
जब देवी अंबिका ने महान संतों को देखा तो वे बेहद शर्मिंदा हुईं क्योंकि उस समय वे बिना वस्त्रों के थीं। तुरंत वे अपने पति की गोद से उठीं और अपने सीने को ढकने की कोशिश करने लगीं।
 
When Goddess Ambika saw these saintly men, she felt extremely ashamed as she was naked at that time. She immediately got up from her husband's lap and tried to cover her breasts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)