श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 1: राजा सुद्युम्न का स्त्री बनना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  9.1.29 
श्रीशुक उवाच
एकदा गिरिशं द्रष्टुमृषयस्तत्र सुव्रता: ।
दिशो वितिमिराभासा: कुर्वन्त: समुपागमन् ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा : एक बार मर्यादाओं का कठोरता से पालन करने वाले महान संत थे, जिनके तेज से सभी दिशाओं के अंधेरे दूर हो जाते थे। वे सभी उस जंगल में भगवान शिव को देखने के लिए आए।
 
Sukadeva Goswami said: Once, great saints who strictly followed spiritual rituals came to that forest to have darshan of Lord Shiva. Due to their radiance, all the darkness in all directions was dispelled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)