श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 1: राजा सुद्युम्न का स्त्री बनना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  9.1.2-3 
योऽसौ सत्यव्रतो नाम राजर्षिर्द्रविडेश्वर: ।
ज्ञानं योऽतीतकल्पान्ते लेभे पुरुषसेवया ॥ २ ॥
स वै विवस्वत: पुत्रो मनुरासीदिति श्रुतम् ।
त्वत्तस्तस्य सुता:प्रोक्ता इक्ष्वाकुप्रमुखा नृपा: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
गत कल्प के अंत में भगवान की कृपा से द्रविड़ देश के पवित्र राजा सत्यव्रत को आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त हुआ और अगले मन्वन्तर में विवस्वान के पुत्र वैवस्वत मनु के रूप में पुनर्जन्म हुआ। मुझे यह ज्ञान आपसे प्राप्त हुआ है। मैं यह भी जानता हूँ कि इक्ष्वाकु आदि राजा उनके पुत्र थे, जैसा कि आपने पहले बताया है।
 
The saintly king Satyavrata of the Dravidian country, by the grace of God, attained spiritual knowledge at the end of the last kalpa and became Vaivasvat Manu, the son of Vivasvan in the next manvantara. I have learnt this from you. I also know that kings like Ikshwaku etc. were his sons, as you have told earlier.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)