निशम्य तद् वचस्तस्य भगवान् प्रपितामह: ।
होतुर्व्यतिक्रमं ज्ञात्वा बभाषे रविनन्दनम् ॥ १९ ॥
अनुवाद
मनु के इन वचनों को सुनकर प्रबल पराक्रमी प्रपितामह वसिष्ठ ऋत्विज होता की चूक समझ गए। इस कारण सूर्यपुत्र से बोले।
Hearing these words of Manu, the very powerful great grandfather Vasishtha understood the mistake of Hota. So he spoke to the son of the Sun in this manner.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥