श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 1: राजा सुद्युम्न का स्त्री बनना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  9.1.15 
प्रेषितोऽध्वर्युणा होता व्यचरत् तत् समाहित: ।
गृहीते हविषि वाचा वषट्कारं गृणन्द्विज: ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
प्रधान पुरोहित के यह कहने पर "अब आहुति दें," आहुति देने वाले (होता) ने आहुति देने के लिए घी लिया। तभी उसे मनु की पत्नी के अनुरोध की याद आई और उसने ‘वषट्’ शब्द का उच्चारण करते हुए यज्ञ संपन्न किया।
 
प्रधान पुरोहित के यह कहने पर "अब आहुति दें," आहुति देने वाले (होता) ने आहुति देने के लिए घी लिया। तभी उसे मनु की पत्नी के अनुरोध की याद आई और उसने ‘वषट्’ शब्द का उच्चारण करते हुए यज्ञ संपन्न किया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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