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श्लोक 8.9.7  |
वयं कश्यपदायादा भ्रातर: कृतपौरुषा: ।
विभजस्व यथान्यायं नैव भेदो यथा भवेत् ॥ ७ ॥ |
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| अनुवाद |
| हम सब देवता और असुर दोनों ही कश्यप ऋषि की संतान हैं और इसी कारण हम आपस में भाई हैं। लेकिन अब हम अपने शक्ति-प्रदर्शन के कारण झगड़ रहे हैं। इसलिए हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि हमारे विवाद को सुलझा दें और इस अमृत को हमारे बीच समान रूप से बांट दें। |
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| हम सब देवता और असुर दोनों ही कश्यप ऋषि की संतान हैं और इसी कारण हम आपस में भाई हैं। लेकिन अब हम अपने शक्ति-प्रदर्शन के कारण झगड़ रहे हैं। इसलिए हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि हमारे विवाद को सुलझा दें और इस अमृत को हमारे बीच समान रूप से बांट दें। |
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