श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 9: मोहिनी-मूर्ति के रूप में भगवान् का अवतार  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  8.9.7 
वयं कश्यपदायादा भ्रातर: कृतपौरुषा: ।
विभजस्व यथान्यायं नैव भेदो यथा भवेत् ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
हम सब देवता और असुर दोनों ही कश्यप ऋषि की संतान हैं और इसी कारण हम आपस में भाई हैं। लेकिन अब हम अपने शक्ति-प्रदर्शन के कारण झगड़ रहे हैं। इसलिए हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि हमारे विवाद को सुलझा दें और इस अमृत को हमारे बीच समान रूप से बांट दें।
 
हम सब देवता और असुर दोनों ही कश्यप ऋषि की संतान हैं और इसी कारण हम आपस में भाई हैं। लेकिन अब हम अपने शक्ति-प्रदर्शन के कारण झगड़ रहे हैं। इसलिए हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि हमारे विवाद को सुलझा दें और इस अमृत को हमारे बीच समान रूप से बांट दें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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