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श्लोक 8.9.6  |
सा त्वं न: स्पर्धमानानामेकवस्तुनि मानिनि ।
ज्ञातीनां बद्धवैराणां शं विधत्स्व सुमध्यमे ॥ ६ ॥ |
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| अनुवाद |
| हम सभी अभी एक ही विषय—अमृत घट—के कारण परस्पर शत्रुता में लगे हुए हैं। यद्यपि हम एक ही परिवार में जन्मे हैं, फिर भी हम में शत्रुता बढ़ती जा रही है। हे सुकुमार कटि वाली, उच्च पद से सुशोभित सुन्दरी! इसलिए हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि आप हमारे इस झगड़े को सुलझाने की कृपा करें। |
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| हम सभी अभी एक ही विषय—अमृत घट—के कारण परस्पर शत्रुता में लगे हुए हैं। यद्यपि हम एक ही परिवार में जन्मे हैं, फिर भी हम में शत्रुता बढ़ती जा रही है। हे सुकुमार कटि वाली, उच्च पद से सुशोभित सुन्दरी! इसलिए हम आपसे प्रार्थना करते हैं कि आप हमारे इस झगड़े को सुलझाने की कृपा करें। |
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