भगवान हरि ने अपने छुरे जैसा तेज़ धार वाला चक्र चलाकर एकदम से राहु का सिर काट दिया। जब राहु का सिर उसके शरीर से कट गया तो वह शरीर अमृत का स्पर्श न होने के कारण जीवित नहीं रह पाया।
Lord Hari instantly severed Rahu's head by waving his discus which was as sharp as a knife. When Rahu's head was cut off from his body, that body could not survive as it had not touched the nectar.
तात्पर्य
जब भगवान के व्यक्तित्व, मोहिनी-मूर्ति, ने राहु के सिर को उसके शरीर से अलग किया, तो शरीर के मरने के बाद भी सिर जीवित रहा। राहु अपने मुंह से अमृत पी रहा था, और अमृत के उसके शरीर में प्रवेश करने से पहले, उसका सिर काट दिया गया। इस प्रकार राहु का सिर जीवित रहा जबकि शरीर मर गया। प्रभु द्वारा किया गया यह चमत्कारिक कार्य यह दिखाने के लिए था कि अमृत एक चमत्कारी अमृत है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥