श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 9: मोहिनी-मूर्ति के रूप में भगवान् का अवतार  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  8.9.23 
तस्यां कृतातिप्रणया: प्रणयापायकातरा: ।
बहुमानेन चाबद्धा नोचु: किञ्चन विप्रियम् ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
असुर मोहिनी-मूर्ति से प्रेम व सम्मान करने लगे थे। वे डरते थे कि कहीं उनके सम्बन्ध बिगड़ न जाएँ। इसलिए उन्होंने उनके वचनों का आदर किया और ऐसा कुछ नहीं बोला जिससे उनकी मित्रता में बाधा पड़े।
 
असुर मोहिनी-मूर्ति से प्रेम व सम्मान करने लगे थे। वे डरते थे कि कहीं उनके सम्बन्ध बिगड़ न जाएँ। इसलिए उन्होंने उनके वचनों का आदर किया और ऐसा कुछ नहीं बोला जिससे उनकी मित्रता में बाधा पड़े।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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