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श्लोक 8.9.23  |
तस्यां कृतातिप्रणया: प्रणयापायकातरा: ।
बहुमानेन चाबद्धा नोचु: किञ्चन विप्रियम् ॥ २३ ॥ |
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| अनुवाद |
| असुर मोहिनी-मूर्ति से प्रेम व सम्मान करने लगे थे। वे डरते थे कि कहीं उनके सम्बन्ध बिगड़ न जाएँ। इसलिए उन्होंने उनके वचनों का आदर किया और ऐसा कुछ नहीं बोला जिससे उनकी मित्रता में बाधा पड़े। |
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| असुर मोहिनी-मूर्ति से प्रेम व सम्मान करने लगे थे। वे डरते थे कि कहीं उनके सम्बन्ध बिगड़ न जाएँ। इसलिए उन्होंने उनके वचनों का आदर किया और ऐसा कुछ नहीं बोला जिससे उनकी मित्रता में बाधा पड़े। |
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