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bhagavat 8.9.1: शुकदेव गोस्वामी ने कहा: तदनन्तर, असुर एक-दूसरे के दुश्मन हो गए। उन्होंने अमृत पात्र को फेंकते और छीनते हुए अपनी दोस्ती को तोड़ दिया। इसी बीच उन्होंने देखा कि एक बहुत ही सुंदर युवती उनकी ओर आ रही है।   |   bhagavat अध्याय 8.9: मोहिनी-मूर्ति के रूप में भगवान् का अवतार   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 9: मोहिनी-मूर्ति के रूप में भगवान् का अवतार  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  8.9.1 
श्रीशुक उवाच
तेऽन्योन्यतोऽसुरा: पात्रं हरन्तस्त्यक्तसौहृदा: ।
क्षिपन्तो दस्युधर्माण आयान्तीं दद‍ृशु: स्त्रियम् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: तदनन्तर, असुर एक-दूसरे के दुश्मन हो गए। उन्होंने अमृत पात्र को फेंकते और छीनते हुए अपनी दोस्ती को तोड़ दिया। इसी बीच उन्होंने देखा कि एक बहुत ही सुंदर युवती उनकी ओर आ रही है।
 
Sukadeva Goswami said: Thereafter the demons became enemies of each other. They broke their friendship by throwing away and snatching the pot of nectar. Meanwhile they saw a very beautiful young lady coming towards them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)