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श्लोक 8.7.6  |
मथ्यमानेऽर्णवे सोऽद्रिरनाधारो ह्यपोऽविशत् ।
ध्रियमाणोऽपि बलिभिर्गौरवात् पाण्डुनन्दन ॥ ६ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे पाण्डुपुत्र! जब क्षीरसागर में मन्दराचल को मथानी के समान उपयोग में लाया गया तो उस मन्दराचल का कोई आधार न होने के कारण बहुत से बलवान असुरों और देवताओं के हाथों से पकड़े जाने पर भी वह जल में डूबने लगा। |
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| हे पाण्डुपुत्र! जब क्षीरसागर में मन्दराचल को मथानी के समान उपयोग में लाया गया तो उस मन्दराचल का कोई आधार न होने के कारण बहुत से बलवान असुरों और देवताओं के हाथों से पकड़े जाने पर भी वह जल में डूबने लगा। |
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