Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.7.6: हे पाण्डुपुत्र! जब क्षीरसागर में मन्दराचल को मथानी के समान उपयोग में लाया गया तो उस मन्दराचल का कोई आधार न होने के कारण बहुत से बलवान असुरों और देवताओं के हाथों से पकड़े जाने पर भी वह जल में डूबने लगा। | bhagavat अध्याय 8.7: शिवजी द्वारा विषपान से ब्रह्माण्ड की रक्षा । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मथ्यमानेऽर्णवे सोऽद्रिरनाधारो ह्यपोऽविशत् ।
ध्रियमाणोऽपि बलिभिर्गौरवात् पाण्डुनन्दन ॥ ६ ॥
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! जब क्षीरसागर में मन्दराचल को मथानी के समान उपयोग में लाया गया तो उस मन्दराचल का कोई आधार न होने के कारण बहुत से बलवान असुरों और देवताओं के हाथों से पकड़े जाने पर भी वह जल में डूबने लगा।
O descendant of Pandu, when the Mandara mountain was being used as a churning rod in the Kshirsagar, it had no support and hence, despite being held by the strong hands of the demons and the gods, it sank in the water.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥