Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 8.7.45: इस कृत्य को सुनकर भवानी (दक्ष की पुत्री), ब्रह्मा, विष्णु और सामान्य लोगों ने भी देवताओं द्वारा पूजे जाने वाले और लोगों को वरदान देने वाले शिवजी के इस कार्य की खूब प्रशंसा की।   |   bhagavat अध्याय 8.7: शिवजी द्वारा विषपान से ब्रह्माण्ड की रक्षा   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 7: शिवजी द्वारा विषपान से ब्रह्माण्ड की रक्षा  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  8.7.45 
निशम्य कर्म तच्छम्भोर्देवदेवस्य मीढुष: ।
प्रजा दाक्षायणी ब्रह्मा वैकुण्ठश्च शशंसिरे ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
इस कृत्य को सुनकर भवानी (दक्ष की पुत्री), ब्रह्मा, विष्णु और सामान्य लोगों ने भी देवताओं द्वारा पूजे जाने वाले और लोगों को वरदान देने वाले शिवजी के इस कार्य की खूब प्रशंसा की।
 
Hearing about this act, Bhavani (Daksha Kanya), Brahma, Vishnu and common people highly praised this act of Shiva who is worshipped by the gods and gives boons to the people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)