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श्लोक 8.7.43  |
तस्यापि दर्शयामास स्ववीर्यं जलकल्मष: ।
यच्चकार गले नीलं तच्च साधोर्विभूषणम् ॥ ४३ ॥ |
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| अनुवाद |
| जैसे अपयश के कारण क्षीरसागर से उत्पन्न विष ने शिवजी के गले में नीली रेखा बनाकर अपनी शक्ति दिखाई हो। परंतु अब वही रेखा भगवान का आभूषण मान ली जाती है। |
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| जैसे अपयश के कारण क्षीरसागर से उत्पन्न विष ने शिवजी के गले में नीली रेखा बनाकर अपनी शक्ति दिखाई हो। परंतु अब वही रेखा भगवान का आभूषण मान ली जाती है। |
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