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श्लोक 8.7.42  |
तत: करतलीकृत्य व्यापि हालाहलं विषम् ।
अभक्षयन्महादेव: कृपया भूतभावन: ॥ ४२ ॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात्, समाज के लिए शुभ अथवा उपकारी कार्य करने में समर्पित शिवजी ने दयापूर्वक सारा ज़हर अपनी हथेली पर रखा और उसे पी गये। |
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| तत्पश्चात्, समाज के लिए शुभ अथवा उपकारी कार्य करने में समर्पित शिवजी ने दयापूर्वक सारा ज़हर अपनी हथेली पर रखा और उसे पी गये। |
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