Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 8.7.36: श्रील शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा: शिवजी सारे जीवों के प्रति सदैव दयालु हैं। जब उन्होंने देखा कि सारे जीव चारों ओर फैल रहे विष से बहुत परेशान हैं, तो वे बहुत दयालु हो गए। इसलिए उन्होंने अपनी सदाबहार संगिनी सती से इस प्रकार कहा। | bhagavat अध्याय 8.7: शिवजी द्वारा विषपान से ब्रह्माण्ड की रक्षा । bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रील शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा: शिवजी सारे जीवों के प्रति सदैव दयालु हैं। जब उन्होंने देखा कि सारे जीव चारों ओर फैल रहे विष से बहुत परेशान हैं, तो वे बहुत दयालु हो गए। इसलिए उन्होंने अपनी सदाबहार संगिनी सती से इस प्रकार कहा।
Srila Sukadeva Goswami further said: Lord Shiva is always benevolent towards all living beings. When he saw that all living beings were extremely distressed due to the spread of poison everywhere, he became very compassionate. So he spoke to his constant companion Sati as follows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥