श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 7: शिवजी द्वारा विषपान से ब्रह्माण्ड की रक्षा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  8.7.29 
मुखानि पञ्चोपनिषदस्तवेश
यैस्त्रिंशदष्टोत्तरमन्त्रवर्ग: ।
यत् तच्छिवाख्यं परमात्मतत्त्वं
देव स्वयंज्योतिरवस्थितिस्ते ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
हे भगवान, आपके पाँच मुख पाँच महत्वपूर्ण वैदिक मंत्रों के प्रतीक हैं जिनसे अड़तीस महत्वपूर्ण वैदिक मंत्र उत्पन्न हुए हैं। आप शिव के नाम से विख्यात स्वयं प्रकाशित हैं। आप प्रत्यक्ष परम सत्य के रूप में परमात्मा नाम से स्थित हैं।
 
O Lord! The five important Vedic mantras signify Your five faces from which the thirty-eight important Vedic mantras have originated. You are self-illuminated and known as Shiva. You are situated as the manifest Supreme Truth known as Paramatma.
तात्पर्य
इस संदर्भ में उल्लिखित पांच मंत्र निम्नलिखित हैं: (१) पुरुष, (२) अघोर, (३) सद्योजाता, (४) वामदेव, और (५) ईशान। ये पाँच मंत्र भगवान शिव द्वारा उच्चारित किए गए सैंतीस विशेष वैदिक मंत्रों की श्रेणी में आते हैं, इसलिए उन्हें शिव या महादेव के रूप में मनाया जाता है। एक और कारण क्यूँ भगवान शिव को शिव कहा जाता है, जिसका अर्थ "सर्व-मंगल" है, वह यह है कि वह स्वयं-प्रकाशित हैं, बिल्कुल भगवान विष्णु की तरह, जो परमात्मा हैं। क्योंकि भगवान शिव सीधे भगवान विष्णु के अवतार हैं, वह भगवान विष्णु के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि के रूप में स्थापित है। इस तथ्य की पुष्टि एक वैदिक मंत्र द्वारा की जाती है: पतिं विश्वस्येदमेश्वरं शाश्वतं। शिवमच्युतम। परमात्मा को अनेक नामों से पुकारा जाता है, जिनमें से महेश्वर, शिव और अच्युत का विशेष रूप से उल्लेख है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)