श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 7: शिवजी द्वारा विषपान से ब्रह्माण्ड की रक्षा  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  8.7.22 
त्वमेक: सर्वजगत ईश्वरो बन्धमोक्षयो: ।
तं त्वामर्चन्ति कुशला: प्रपन्नार्तिहरं गुरुम् ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! आप सारे विश्व के बंधन और मोक्ष के कारण हो क्योंकि आप उसके शासक हो। जो लोग आध्यात्मिक चेतना में बढ़े-चढ़े हैं, वे आपकी शरण में जाते हैं, अतः आप उनके कष्टों को दूर करने वाले हो और उनकी मुक्ति के भी आप ही कारण हो। अतः हम आपकी पूजा करते हैं।
 
हे प्रभु! आप सारे विश्व के बंधन और मोक्ष के कारण हो क्योंकि आप उसके शासक हो। जो लोग आध्यात्मिक चेतना में बढ़े-चढ़े हैं, वे आपकी शरण में जाते हैं, अतः आप उनके कष्टों को दूर करने वाले हो और उनकी मुक्ति के भी आप ही कारण हो। अतः हम आपकी पूजा करते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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