श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 7: शिवजी द्वारा विषपान से ब्रह्माण्ड की रक्षा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  8.7.19 
तदुग्रवेगं दिशि दिश्युपर्यधो
विसर्पदुत्सर्पदसह्यमप्रति ।
भीता: प्रजा दुद्रुवुरङ्ग सेश्वरा
अरक्ष्यमाणा: शरणं सदाशिवम् ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
ऐ राजन, जब वह अत्यंत वेग से फैलने वाला भयंकर विष सभी दिशाओं में फैल रहा था, तब सारे देवता भगवान समेत सदाशिव के पास पहुँचे। उन्होंने स्वयं को असहाय और बहुत अधिक भयभीत महसूस करते हुए उनसे शरण माँगी।
 
O King! When that fiery poison started spreading rapidly up and down and in all directions, all the gods including the Lord went to Lord Shiva (Sadashiva). Finding themselves unsafe and extremely frightened, they all started seeking refuge from him.
तात्पर्य
कोई सवाल उठा सकता है कि जब स्वयं परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित थे, तब उन्होंने सभी देवताओं और सामान्य लोगों के साथ स्वयं हस्तक्षेप करने के बजाय लॉर्ड सदाशिवा की शरण लेने के लिए क्यों साथ दिया? इस संबंध में, श्रील माधवाचार्य ने चेतावनी दी है:

रुद्रस्य यशसो अर्थ्य

स्वयं विष्णु विषं विभुः

न संजये समर्थोऽपि

वायुं चोचे प्रशांतये

लॉर्ड विष्णु स्थिति को सुधारने के लिए सक्षम थे, लेकिन लॉर्ड शिव को श्रेय देने के लिए, जिन्होंने बाद में सभी जहर पी लिया और उसे अपने गले में रखा, लॉर्ड विष्णु ने कोई कार्रवाई नहीं की।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)