तद् विद्धि प्रणिपातेन
परिप्रश्नेन सेवया
उपदेक्ष्यंति ते ज्ञानं
ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः
"एक आध्यात्मिक गुरु से संपर्क करके ही सत्य सीखने का प्रयास करें। उससे विनम्रतापूर्वक पूछताछ करें और उसकी सेवा करें। आत्म-साक्षात्कारी आत्मा आपको ज्ञान प्रदान कर सकता है क्योंकि उसने सत्य को देखा है।" भगवान ब्रह्मा इन आत्म-साक्षात्कारी अधिकारियों में से एक हैं (स्वयंभूर नारदः शंभूः कुमारो कपिलो मनुः)। इसलिए व्यक्ति को भगवान ब्रह्मा से शिष्य परंपरा को स्वीकार करना चाहिए, और तभी वह भगवान सर्वोच्च व्यक्तित्व को पूर्णता में समझ सकता है। यहाँ विश्व-मूर्ती शब्द इंगित करता है कि सब कुछ भगवान सर्वोच्च व्यक्तित्व के रूप में मौजूद है। जो व्यक्ति उनकी पूजा करने में सक्षम है वह उनमें सब कुछ देख सकता है और उन्हें हर चीज में देख सकता है।
