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bhagavat 8.6.30: अत्यधिक बुद्धिमान एवं देवताओं के राजा इन्द्र ने बलि महाराज को मधुर शब्दों से प्रसन्न करके उन तमाम प्रस्तावों को अत्यधिक विनम्रता पूर्वक प्रस्तुत किया था जिन्हें भगवान विष्णु ने उन्हें सिखाया था।   |   bhagavat अध्याय 8.6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.6.30 
महेन्द्र: श्लक्ष्णया वाचा सान्‍त्वयित्वा महामति: ।
अभ्यभाषत तत् सर्वं शिक्षितं पुरुषोत्तमात् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
अत्यधिक बुद्धिमान एवं देवताओं के राजा इन्द्र ने बलि महाराज को मधुर शब्दों से प्रसन्न करके उन तमाम प्रस्तावों को अत्यधिक विनम्रता पूर्वक प्रस्तुत किया था जिन्हें भगवान विष्णु ने उन्हें सिखाया था।
 
Indra, the most intelligent King of the demigods, having pleased Bali Maharaja with courteous words, very humbly presented all the proposals that Lord Viṣṇu had taught him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)