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bhagavat 8.6.24: हे देवताओं! धैर्य और शांति से हर काम किया जा सकता है, परंतु यदि कोई क्रोध से भर गया तो लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती। इसीलिए, असुर जो भी मांगें, उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लो।   |   bhagavat अध्याय 8.6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  8.6.24 
यूयं तदनुमोदध्वं यदिच्छन्त्यसुरा: सुरा: ।
न संरम्भेण सिध्यन्ति सर्वार्था: सान्‍त्वया यथा ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! धैर्य और शांति से हर काम किया जा सकता है, परंतु यदि कोई क्रोध से भर गया तो लक्ष्य की प्राप्ति नहीं होती। इसीलिए, असुर जो भी मांगें, उनके प्रस्ताव को स्वीकार कर लो।
 
O Gods! Every task can be accomplished with patience and peace, but if someone is agitated with anger, the goal cannot be achieved. Therefore, whatever the demons ask for, accept their proposal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)