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bhagavat 8.6.21: तुरंत ही अमृत बनाओ, जिसे पीकर मौत के कगार पर बैठा व्यक्ति भी अमर हो जाए।   |   bhagavat अध्याय 8.6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  8.6.21 
अमृतोत्पादने यत्न: क्रियतामविलम्बितम् ।
यस्य पीतस्य वै जन्तुर्मृत्युग्रस्तोऽमरो भवेत् ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
तुरंत ही अमृत बनाओ, जिसे पीकर मौत के कगार पर बैठा व्यक्ति भी अमर हो जाए।
 
Immediately try to produce nectar by drinking which a dying person can become immortal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)