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bhagavat 8.6.16: श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा: जब ब्रह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवताओं ने भगवान की स्तुति की तो भगवान उनके वहाँ आने का प्रयोजन समझ गए। इसलिए, बादलों की गर्जना के समान गंभीर वाणी में भगवान ने उन देवताओं को उत्तर दिया जो हाथ जोड़कर सावधानी से वहाँ खड़े थे।   |   bhagavat अध्याय 8.6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  8.6.16 
श्रीशुक उवाच
एवं विरिञ्चादिभिरीडितस्तद्
विज्ञाय तेषां हृदयं यथैव ।
जगाद जीमूतगभीरया गिरा
बद्धाञ्जलीन्संवृतसर्वकारकान् ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा: जब ब्रह्मा जी के नेतृत्व में सभी देवताओं ने भगवान की स्तुति की तो भगवान उनके वहाँ आने का प्रयोजन समझ गए। इसलिए, बादलों की गर्जना के समान गंभीर वाणी में भगवान ने उन देवताओं को उत्तर दिया जो हाथ जोड़कर सावधानी से वहाँ खड़े थे।
 
Sri Sukadeva Goswami further said: When all the demigods, including Brahmā, praised the Lord, He understood the purpose of their visit. Therefore, the Lord replied in a voice as deep as the roar of a cloud to the demigods who were standing there attentively with folded hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)