हरिः नाम हरिः नाम
हरिः नामैव केवलम
कलौ नास्त्येव नास्त्येव
नास्त्येव गतिरन्यथा
"झगड़े और पाखंड के इस युग में, मुक्ति का एकमात्र साधन भगवान के पवित्र नाम का जाप करना है। कोई दूसरा रास्ता नहीं है। कोई दूसरा रास्ता नहीं है। कोई दूसरा रास्ता नहीं है।" अपने शिक्शाष्टक में, भगवान चैतन्य कहते हैं, परम विजायते श्री-कृष्ण-संकीर्तनम: "श्री-कृष्ण-संकीर्तन के जाप की सभी महिमा!" महा-मंत्र - हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे/ हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे - स्वयं भगवान द्वारा सीधे उच्चारित किया जाता है, जो हमें मुक्ति के लिए यह मंत्र देते हैं।
हम भौतिक अस्तित्व के खतरों से मुक्त होने का कोई भी साधन नहीं बना सकते। यहाँ, यहाँ तक कि देवताओं, जैसे भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव, और प्रजापति, जैसे दक्ष, को सर्वोच्च भगवान की उपस्थिति में प्रकाशमान चिंगारियों के रूप में कहा जाता है, जिनकी तुलना एक महान अग्नि से की जाती है। चिंगारियाँ तब तक सुंदर होती हैं जब तक वे आग में होती हैं। इसी तरह, हमें भगवान के साथ रहना होगा और हमेशा भक्ति में संलग्न रहना होगा, क्योंकि तभी हम हमेशा शानदार और प्रकाशमान रहेंगे। भगवान की सेवा से जैसे ही हम गिरते हैं, हमारी प्रतिभा और रोशनी तुरंत बुझ जाएगी, या कम से कम कुछ समय के लिए रुक जाएगी। जब हम जीवित प्राणी, जो मूल अग्नि की चिंगारियों की तरह हैं, सर्वोच्च भगवान, एक भौतिक स्थिति में गिर जाते हैं, तो हमें सर्वोच्च भगवान से मंत्र लेना चाहिए जैसा कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने दिया है। इस हरे कृष्ण मंत्र का जाप करने से, हम इस भौतिक संसार की सभी कठिनाइयों से मुक्त हो जाएंगे।
