स त्वं विधत्स्वाखिललोकपाला
वयं यदर्थास्तव पादमूलम् ।
समागतास्ते बहिरन्तरात्मन्
किं वान्यविज्ञाप्यमशेषसाक्षिण: ॥ १४ ॥
अनुवाद
हे भगवन! हम देवता, इस ब्रह्मांड के नियंत्रक आपके चरणों में आए हैं। हम अपने उद्देश्य में सफल होना चाहते हैं, इसलिए कृपया इसे पूरा करें। आप सबकुछ के अंदर और बाहर के साक्षी हैं, इसलिए कुछ भी आपसे छिपा नहीं है। इसलिए पुनः आपको कुछ भी बताना बेकार है।
O Lord! We various demigods, the directors of this universe, have come to your feet. Please fulfill the purpose for which we have come. You are the witness of everything from within and outside. Nothing is unknown to you, so it is useless to inform you again about anything.
तात्पर्य
जैसा कि भगवद्-गीता (13.3) में कहा गया है, क्षेत्रज्ञं चापि माम विद्धि सर्व-क्षेत्रेषु भारत। व्यक्तिगत आत्माएं अपने-अपने शरीरों की स्वामिनी हैं, लेकिन भगवान सर्वोच्च व्यक्तित्व सभी शरीरों के स्वामी हैं। चूंकि वह सभी के शरीर का साक्षी है, इसलिए उसके लिए कुछ भी अज्ञात नहीं है। वह जानता है कि हमें क्या चाहिए। इसलिए हमारा कर्तव्य यह है कि हम आध्यात्मिक गुरु के निर्देशन में निष्ठापूर्वक भक्ति सेवा का पालन करें। कृष्ण, अपनी कृपा से, हमारी भक्ति सेवा को निष्पादित करने के लिए जो भी आवश्यक होगा वह प्रदान करेंगे। कृष्ण भावना आंदोलन में, हमें बस कृष्ण और गुरु के आदेश का पालन करना है। तब सभी आवश्यक चीजें कृष्ण द्वारा प्रदान की जाएंगी, भले ही हम उनसे न भी मांगें।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥