तस्यानुभाव: कथितो गुणाश्च परमोदया: ।
भौमान्रेणून्स विममे यो विष्णोर्वर्णयेद् गुणान् ॥ ६ ॥
अनुवाद
यद्यपि भगवान के विभिन्न अवतारों के महान कार्यों और दिव्य गुणों का अद्भुत वर्णन किया जाता है, किंतु कभी-कभी हम उन्हें ठीक से समझ नहीं पाते। परंतु भगवान विष्णु के लिए सब कुछ संभव है। यदि कोई पूरे ब्रह्मांड के परमाणुओं को गिन सके, तो वह भगवान के गुणों की संख्या बता सकता है। लेकिन यह संभव नहीं है। इसीलिए कोई भी भगवान के दिव्य गुणों की गणना नहीं कर सकता।
Although the great deeds and transcendental qualities of the various incarnations of the Lord are wonderfully described, sometimes we are unable to understand them. But everything is possible for Lord Viṣṇu. If one could count all the atoms of the universe, one could count the qualities of the Lord. But that is not possible. Therefore, one cannot count the transcendental qualities of the Lord.
तात्पर्य
इस संदर्भ में भगवान के महिमामय कार्यकलापों का संकेत उस समय हुआ जब उनके निजी अंगरक्षक जय और विजय दैत्य बन गये थे, जिसे महान ऋषियों सनका, सनातन, सनत-कुमार और सनांदन ने शाप दिया था। जय, हिरण्यकश्यप के रूप में, वराहदेव से युद्ध करने आया था, और उसी वराहदेव का उल्लेख रैवत सहस्राब्द से संबंधित में किया गया है। हालाँकि, युद्ध पहले मनु, स्वायम्भुव के शासनकाल के दौरान हुआ था। इसलिए कुछ अधिकारियों के अनुसार दो वराह हैं। हालाँकि, अन्य लोगों के अनुसार, वराह स्वायम्भुव मनु के शासनकाल के दौरान प्रकट हुए और रैवत मनु के शासन तक पानी में रहे। कुछ को संदेह हो सकता है कि यह संभव हो सकता है, लेकिन उत्तर यह है कि सब कुछ संभव है। यदि कोई ब्रह्मांड के भीतर परमाणुओं की गणना कर सकता है, तो कोई भगवान विष्णु के गुणों की गणना कर सकता है। लेकिन ब्रह्मांड के परमाणुओं को किसी के लिए भी गिनना असंभव है, और इसी तरह कोई भी प्रभु के पारलौकिक गुणों की गिनती नहीं कर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥