श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 5: देवताओं द्वारा भगवान् से सुरक्षा याचना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  8.5.5 
वैकुण्ठ: कल्पितो येन लोको लोकनमस्कृत: ।
रमया प्रार्थ्यमानेन देव्या तत्प्रियकाम्यया ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान वैकुण्ठ ने धन की देवी लक्ष्मी (रमा) को प्रसन्न करने के लिए, उनके अनुरोध पर, एक अन्य वैकुण्ठ लोक की रचना की, जिसकी सभी लोग पूजा करते हैं।
 
भगवान वैकुण्ठ ने धन की देवी लक्ष्मी (रमा) को प्रसन्न करने के लिए, उनके अनुरोध पर, एक अन्य वैकुण्ठ लोक की रचना की, जिसकी सभी लोग पूजा करते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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