भगवान वैकुण्ठ ने धन की देवी लक्ष्मी (रमा) को प्रसन्न करने के लिए, उनके अनुरोध पर, एक अन्य वैकुण्ठ लोक की रचना की, जिसकी सभी लोग पूजा करते हैं।
To please Goddess Lakshmi (Rama) of wealth, Lord Vaikuntha, on her request, created another Vaikuntha Loka which is worshipped by all.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर यहाँ टिप्पणी करते हैं कि यह वैकुण्ठ ग्रह, श्रीमद्-भागवतम की तरह, प्रकट होता है और कहा जाता है कि यह जन्म या रचा गया है, लेकिन श्रीमद्-भागवतम और वैकुण्ठ दोनों ही आठ प्रकार के आवरणों से ढके भौतिक ब्रह्मांडों से परे अनंत काल से विद्यमान हैं। द्वितीय कांड में वर्णित अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने ब्रह्मांड के निर्माण से पहले वैकुण्ठ को देखा था। वीरराघव आचार्य बताते हैं कि यह वैकुण्ठ ब्रह्मांड के भीतर है। यह लोकालोक के नाम से जाने जाने वाले पर्वत के ऊपर स्थित है। इस ग्रह की पूजा हर कोई करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥