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श्लोक 8.5.4  |
पत्नी विकुण्ठा शुभ्रस्य वैकुण्ठै: सुरसत्तमै: ।
तयो: स्वकलया जज्ञे वैकुण्ठो भगवान्स्वयम् ॥ ४ ॥ |
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| अनुवाद |
| शुभ्र और उनकी पत्नी विकुण्ठा के योग से भगवान वैकुण्ठ अपने स्वांश देवताओं के साथ प्रकट हुए। |
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| शुभ्र और उनकी पत्नी विकुण्ठा के योग से भगवान वैकुण्ठ अपने स्वांश देवताओं के साथ प्रकट हुए। |
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