श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 5: देवताओं द्वारा भगवान् से सुरक्षा याचना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  8.5.34 
सोमं मनो यस्य समामनन्ति
दिवौकसां यो बलमन्ध आयु: ।
ईशो नगानां प्रजन: प्रजानां
प्रसीदतां न: स महाविभूति: ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
सोम (चन्द्रमा) समस्त देवताओं के लिए अन्न, बल और लंबी आयु का स्रोत है। वो सभी पेड़-पौधों का स्वामी और सभी जीवों की उत्पत्ति का स्रोत भी है। जैसा कि विद्वानों ने कहा है, चन्द्रमा भगवान का मन है। सभी ऐश्वर्यों के स्रोत भगवान हम पर प्रसन्न हों।
 
सोम (चन्द्रमा) समस्त देवताओं के लिए अन्न, बल और लंबी आयु का स्रोत है। वो सभी पेड़-पौधों का स्वामी और सभी जीवों की उत्पत्ति का स्रोत भी है। जैसा कि विद्वानों ने कहा है, चन्द्रमा भगवान का मन है। सभी ऐश्वर्यों के स्रोत भगवान हम पर प्रसन्न हों।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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