श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 5: देवताओं द्वारा भगवान् से सुरक्षा याचना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  8.5.30 
न यस्य कश्चातितितर्ति मायां
यया जनो मुह्यति वेद नार्थम् ।
तं निर्जितात्मात्मगुणं परेशं
नमाम भूतेषु समं चरन्तम् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
कोई भी भगवान् की माया से परे नहीं जा सकता है, जो इतनी प्रबल है कि हर व्यक्ति इससे भ्रमित होकर जीवन का लक्ष्य समझने की अपनी बुद्धि खो देता है। लेकिन वही माया उन भगवान् के वश में रहती है, जो सब पर शासन करते हैं और सभी जीवों के प्रति समान दृष्टिकोण रखते हैं। हम उन्हें नमस्कार करते हैं।
 
No one can overcome the illusion of God, which is so strong that everyone gets confused and loses the wisdom to understand the goal of life. But that illusion is under the control of the Lord, who rules over all and sees all living beings equally. We offer our obeisances to Him.
तात्पर्य
भौतिक प्रकृति के नियंत्रण में होने के कारण, सभी जीवों को भगवान विष्णु की शक्ति का सेवन (भोग) करते हुए देखना चाहिए। महान भगवान की शक्ति का भोग करने के कारण, जीव भूल गए हैं कि उनकी आत्मा का अंतिम गंतव्य (स्वार्थ-गति) भगवान विष्णु है। पूर्व श्लोक में जीव भगवान विष्णु को भूलने के कारण सांसारिक भोगों में लिप्त हैं। वे जीव जो भगवान विष्णु का भोग कर रहे हैं, उन्हें पता नहीं है कि उनके अस्तित्व का अंतिम गंतव्य क्या है। भगवान विष्णु की बाहरी शक्ति जीवों को ऐसा अवसर प्रदान करती है जो इस भौतिक संसार के भीतर खुश रहने का प्रतीत होता है। बहरहाल, यह माया है; दूसरे शब्दों में, यह एक ऐसा सपना है जो कभी भी पूरा नहीं होने वाला है। इसलिए प्रत्येक जीव भगवान की बाहरी ऊर्जा से भ्रमित है। वह भ्रामक ऊर्जा निस्संदेह बहुत शक्तिशाली है, परन्तु वह पूरी तरह से उस व्यक्तिगत देवता के नियंत्रण में है जिसे इस श्लोक में परेशम (आध्यात्मिक प्रभु) के रूप में वर्णित किया गया है। भगवान भौतिक सृष्टि का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि सृष्टि से परे हैं। इसलिए, वह केवल अपनी बाहरी ऊर्जा के माध्यम से ही हमारे शरीर को नियंत्रण नहीं करता है, अपितु बाहरी ऊर्जा को भी अपने नियंत्रण में रखता है। भगवद गीता स्पष्ट रूप से कहती है कि मजबूत भौतिक ऊर्जा हर किसी को नियंत्रित करती है और उसके नियंत्रण से बाहर निकलना बेहद मुश्किल है। इस तरह की नियंत्रण वाली ऊर्जा भगवान की है और उनके नियंत्रण में काम करती है। हालाँकि, जीव भौतिक ऊर्जा का आनंद ले रहे हैं और भगवान को भूल गए हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)