स विलोक्येन्द्रवाय्वादीन् नि:सत्त्वान्विगतप्रभान् ।
लोकानमङ्गलप्रायानसुरानयथा विभु: ॥ १९ ॥
समाहितेन मनसा संस्मरन्पुरुषं परम् ।
उवाचोत्फुल्लवदनो देवान्स भगवान्पर: ॥ २० ॥
अनुवाद
यह देखकर कि सभी देवताओं से प्रभाव और शक्ति छीन ली गयी और परिणामस्वरूप तीनों लोक अशुभ हो गये हैं, यह देखकर कि देवताओं की स्थिति अटपटी है, जबकि सभी दानव पनप रहे हैं, ब्रह्मा जी, जो सभी देवताओं से ऊपर हैं और अत्यंत शक्तिशाली हैं, ने अपना मन भगवान पर केन्द्रित किया। इस प्रकार प्रोत्साहित होकर, उनका चेहरा चमक उठा और उन्होंने देवताओं से इस प्रकार बात की।
Seeing that all the demigods had become powerless and ineffective, and as a result of which the three worlds had become ominous, and seeing that the situation of the demigods was awkward but the demons were prospering, Brahma, who was above all demigods and extremely powerful, focused his mind on the Supreme Personality of Godhead. Thus encouraged, his face glowed and he spoke to the demigods as follows.
तात्पर्य
देवताओं की असली स्थिति सुनने के बाद, भगवान ब्रह्मा बहुत चिंतित हो गए क्योंकि दानव बिना किसी कारण के बहुत शक्तिशाली हो गए थे। जब दानव शक्तिशाली बन जाते हैं, तो पूरा विश्व एक अजीब स्थिति में आ जाता है क्योंकि दानव केवल अपने संतुष्टि में रुचि रखते हैं और दुनिया के भलाई में नहीं। हालाँकि, देवता या भक्त सभी जीवित प्राणियों की भलाई में रुचि रखते हैं। उदाहरण के लिए, श्रील रूप गोस्वामी ने अपना मंत्रित्व त्याग दिया और पूरी दुनिया के लाभ के लिए वृंदावन (लोकानम हित-कामिनौ) गए। यह एक संत या देवता का स्वभाव है। यहाँ तक कि निराकारवादी भी सभी लोगों की भलाई के बारे में सोचते हैं। इस तरह से ब्रह्मा दानवों को सत्ता में देखकर बहुत चिंतित थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥