श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जब असुरों ने युद्ध में देवताओं पर अपने सर्पों से हमला किया, तो बहुत से देवता मारे गए और उन्हें फिर से जीवित नहीं किया जा सका। उस समय, हे राजन! दुर्वासा मुनि ने देवताओं को शाप दिया हुआ था, तीनों लोक दरिद्रता से पीड़ित थे और इसलिए अनुष्ठान नहीं किए जा सक रहे थे। उसके प्रभाव बहुत गंभीर थे।
Sri Sukadeva Goswami said: When the demons fiercely attacked the gods in battle with their respective snake-weapons, many gods fell down and died. They could not be revived. O King! At that time the gods were cursed by sage Durvasa, the three worlds were suffering from poverty; therefore the anushthaanas (ritual ceremonies) were not being performed. Its effects were very serious.
तात्पर्य
ऐसा वर्णन किया गया है कि जब दुर्वास ऋषि रास्ते से गुजर रहे थे, उन्होंने देवराज इंद्र को उनके हाथी की पीठ पर देखा और वे उन्हें अपने गले की माला भेंट करने के लिए प्रसन्न हुए। हालाँकि, बहुत घमंडी होने के कारण, इंद्र ने माला ली, और दुर्वास ऋषि के लिए सम्मान नहीं होने के कारण, उन्होंने उसे अपने पालतू हाथी की सूंड पर रख दिया। हाथी, एक जानवर होने के नाते, माला के मूल्य को नहीं समझ सका और इस तरह हाथी ने माला को अपने पैरों के बीच फेंक दिया और उसे कुचल दिया। इस अपमानजनक व्यवहार को देखकर, दुर्वास ऋषि ने तुरंत इंद्र को शाप दिया कि उन्हें सभी भौतिक ऐश्वर्य से वंचित होकर गरीबी से त्रस्त होना पड़ेगा। इस प्रकार देवताओं, एक तरफ लड़ने वाले राक्षसों और दूसरी तरफ दुर्वास ऋषि के श्राप से पीड़ित होने के कारण, तीनों लोकों में अपनी सभी भौतिक संपत्ति खो दी। भौतिकवादी प्रगति में अत्यधिक संपन्न होना कभी-कभी बहुत जोखिम भरा होता है। भौतिक रूप से संपन्न व्यक्ति किसी की परवाह नहीं करता है, और इस प्रकार वह महान व्यक्तियों, जैसे भक्तों और महान संतों का अपमान करता है। भौतिक संपन्नता का यही तरीका है। जैसा कि शुकदेव गोस्वामी द्वारा वर्णित है, धन-दुर्मादांधा: बहुत अधिक धन व्यक्ति को अंधा बना देता है। यह देवराज इंद्र के साथ उनके स्वर्गीय राज्य में भी होता है, और इस भौतिक संसार में दूसरों की क्या बात करें? जब व्यक्ति भौतिक रूप से संपन्न होता है, तो उसे वैष्णवों और संत पुरुषों के प्रति संयमी और अच्छे व्यवहार करना सीखना चाहिए; अन्यथा उसका पतन निश्चित है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥