Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 8.4.25: हे मेरे प्रिय भक्त, जो व्यक्ति रात के अंत में उठते हैं और आप द्वारा अर्पित स्तुति के साथ मेरी प्रार्थना करते हैं, उन्हें मैं उनके जीवन के अंत में आध्यात्मिक दुनिया में एक शाश्वत निवास स्थान प्रदान करता हूँ।   |   bhagavat अध्याय 8.4: गजेन्द्र का वैकुण्ठ गमन   ।   bhagavat स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 4: गजेन्द्र का वैकुण्ठ गमन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  8.4.25 
ये मां स्तुवन्त्यनेनाङ्ग प्रतिबुध्य निशात्यये ।
तेषां प्राणात्यये चाहं ददामि विपुलां गतिम् ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
हे मेरे प्रिय भक्त, जो व्यक्ति रात के अंत में उठते हैं और आप द्वारा अर्पित स्तुति के साथ मेरी प्रार्थना करते हैं, उन्हें मैं उनके जीवन के अंत में आध्यात्मिक दुनिया में एक शाश्वत निवास स्थान प्रदान करता हूँ।
 
O dear devotee, to those who get up from bed at the end of the night and pray to Me with this prayer offered by you, I grant them eternal residence in the Vaikuntha planet at the end of their lives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)